Bhopal Drug Capital: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल अपने शैल शिखरों और सुकून पसंद लोगों के लिए जानी जाती है। लेकिन दबे पांव ये शहर कब नशे की गिरफ्त में आ गया पता ही नहीं चला।
आज भोपाल को लोग ड्रग कैपिटल कहने लगे हैं, इसकी वजह बने है एक के बाद एक सामने आ रहे वो मामले जो बताते है कि किस तरह नशे के कारोबार का सेंटर बन गया भोपाल।
एमडीएमए, कोकीन और हाइड्रोपोनिक गांजा जैसी सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी तेजी से बढ़ रही है। यह सबसे ज्यादा युवाओं को प्रभावित कर रही है। पुलिस और सरकार इसे रोकने की कोशिश कर रही है।

2025 सामने आए ये मामले

  • 30 अगस्त 2025: डीआरआई ने भोपाल रेलवे स्टेशन पर युगांडा की एक महिला से 4 करोड़ रुपये की कोकीन और क्रिस्टल मेथ जब्त की। यह दो हफ्तों में तीसरी बड़ी गिरफ्तारी थी।
  • 22 अगस्त 2025: राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन से 72 किलो हाइड्रोपोनिक गांजा पकड़ा गया, जिसकी कीमत लगभग 72 करोड़ रुपये थी।
  • 18 अगस्त 2025: जगदीशपुर इलाके में अवैध ड्रग फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ। यहां से 61.2 किलो मेफेड्रोन (एमडीएमए) जब्त हुआ और सात लोग गिरफ्तार हुए।
  • जुलाई 2025: जिम और कॉलेजों में चल रहे ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ, जहां लड़कियों को निशाना बनाया जा रहा था। चार लोग गिरफ्तार हुए, जिनमें एक बीजेपी नेता का बेटा भी शामिल था।

राजनीति में हलचल

ड्रग्स की समस्या पर राजनीति भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने भोपाल को ‘ड्रग कैपिटल’ कहा और भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि ड्रग माफिया को संरक्षण मिल रहा है।

NSUI ने इसके खिलाफ प्रदर्शन किया और कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश में ड्रग्स की समस्या देश में सबसे ज्यादा है। कुछ रिपोर्ट्स में दाऊद इब्राहिम के सहयोगियों से लिंक भी सामने आए हैं।

क्यों बड़ रहे मामले?

भोपाल की लोकेशन और कनेक्टिविटी इसे ड्रग तस्करों के लिए आसान बनाती है। यह देश के बीच में स्थित है और रेल व सड़क से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। कई ड्रग फैक्टरियां छिपी हुई चल रही हैं, अक्सर बंद कारखानों में, जिम, कॉलेज और क्लिनिक में युवा आसानी से इनके जाल में फंस रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस की निगरानी कम होने के कारण समस्या बढ़ रही है।

सरकार और पुलिस की कार्रवाई

सरकार इस समस्या से निपटने के लिए एक्टिव है। DRI, NCB और लोकल पुलिस ने कई रेड की हैं। कुछ ड्रग माफिया की कोठियों को कोर्ट के आदेश पर तोड़ा गया। ‘ऑपरेशन क्रिस्टल ब्रेक’ जैसे अभियान भी चलाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अब और सख्त कदम उठाने की जरूरत है, जैसे जागरूकता अभियान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग।

शहर को सुरक्षित बनाने की जरूरत

भोपाल को ड्रग कैपिटल बनने से रोकना सबकी जिम्मेदारी है। युवाओं को नशे से दूर रहना चाहिए और संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट करनी चाहिए। अगर सही समय पर कदम उठाए गए, तो शहर फिर से सुरक्षित और युवा-मित्र बन सकता है।