मध्य प्रदेश जैसे राज्य में, जहां भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के नेता इन कांडों में शामिल पाए गए हैं, सरकारी कर्मचारी अपने कर्तव्य निभाते हुए भी असुरक्षित महसूस करते हैं। आइए, कुछ प्रमुख मामलों पर नजर डालें, जो इस समस्या की गहराई को दर्शाते हैं। ये मामले विभिन्न स्रोतों से एकत्रित हैं और राजनीतिक दबाव के बावजूद कानूनी प्रक्रिया की मांग करते हैं।प्रमुख मामले और उनकी हकीकत
टोल बूथ पर हमला: नंदकुमार सिंह चौहान का कांड
अक्टूबर 2018 में, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान और उनके साथियों ने टोल बूथ कर्मचारियों पर बेरहमी से हमला किया। कर्मचारियों को पीटा गया और गालियां दी गईं।
यह घटना मध्य प्रदेश में हुई, जहां नेता की गाड़ी को टोल न देने पर रोका गया था।
परिणामस्वरूप, आरोपी गिरफ्तार किए गए, लेकिन यह मामला राजनीतिक नेताओं की उस मानसिकता को दिखाता है जहां सरकारी कर्मचारी उनके रास्ते में बाधा बन जाते हैं।
क्रिकेट बैट से हमला: आकाश विजयवर्गीय की गुंडागर्दी
जून 2019 में इंदौर में, भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय के बेटे और विधायक आकाश विजयवर्गीय ने नगर निगम के भवन निरीक्षक धीरेंद्र सिंह बैस पर क्रिकेट बैट से हमला कर दिया।
यह एक अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के दौरान हुआ।
आकाश को गिरफ्तार किया गया, लेकिन सितंबर 2024 में अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया।
क्या यह राजनीतिक पहुंच का नतीजा था? यह मामला साफ दर्शाता है कि नेता सरकारी अधिकारियों को अपनी मर्जी से सजा देने का हक समझते हैं।
सतना में पंचायत अध्यक्ष का हमला
जून 2019 में सतना में, भाजपा पंचायत अध्यक्ष राम एस पटेल ने नगर पंचायत के मुख्य नगरपालिका अधिकारी देवरत्न सोनी पर हमला किया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं।
आरोपी को गिरफ्तार किया गया। यह घटना स्थानीय स्तर पर राजनीतिक दबदबे का उदाहरण है, जहां नेता सरकारी कर्मचारियों को अपनी सत्ता के आगे झुकने के लिए मजबूर करते हैं।
मंत्री के रिश्तेदारों का हमला
नवंबर 2019 में इंदौर के सन्योगितागंज क्षेत्र में, राज्य स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट (तब कांग्रेस सरकार में) के रिश्तेदारों और समर्थकों – विकी खटीक, कपिल कौशिक, चंदू सिलावट, राहुल सिलावट – ने नगर निगम टीम पर हमला किया।
टीम मंत्री के जन्मदिन के होर्डिंग्स हटा रही थी। आईपीसी की धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई। यह दिखाता है कि राजनीतिक परिवार सरकारी कर्मचारियों को अपनी इमेज के लिए खतरा मानते हैं।
धमकी का खेल: लखन सिंह यादव के रिश्तेदार
नवंबर 2019 में श्योपुर के बेनीपुरा गांव से जुड़े मामले में, राज्य पशुपालन मंत्री लखन सिंह यादव (कांग्रेस) के रिश्तेदार संजय सिंह यादव ने जनपद पंचायत के सीईओ जोशुआ पीटर को फोन पर जूतों से पीटने की धमकी दी। यह चेक डैम निर्माण में देरी पर हुआ।
शिकायत दर्ज हुई, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ा। नेता सरकारी अधिकारियों को दूरभाष पर भी अपमानित करने से नहीं चूकते।
दलित युवक की हत्या और मंत्री से जुड़ाव
अगस्त 2023 में सागर में, एक समूह ने दलित युवक को लाठी-डंडों से मार डाला और उसकी मां को निर्वस्त्र कर पीटा।
आरोपी चार साल पुराने यौन उत्पीड़न मामले को वापस लेने का दबाव बना रहे थे। मुख्य आरोपी विक्रम सिंह भाजपा मंत्री भूपेंद्र सिंह के साथ फोटो में दिखे।
राजनीतिक विवाद हुआ, लेकिन हमलावरों की सीधी भूमिका स्पष्ट नहीं। यह मामला राजनीतिक संरक्षण की छाया में हिंसा को दर्शाता है।
पुलिस एएसआई को धमकी: सिंगरौली का वीडियो
सितंबर 2024 में सिंगरौली में, एक भाजपा नेता ने पुलिस एएसआई को धमकाया कि “मैं तुम्हारा वर्दी उतरवा दूंगा”। एएसआई ने गुस्से में अपनी वर्दी फाड़ दी।
घटना वायरल हुई, लेकिन एफआईआर की कोई जानकारी नहीं। यह पुलिस जैसे मजबूत विभाग के कर्मचारियों पर भी राजनीतिक दबाव को उजागर करता है।
कलेक्टर को गाली और धमकी: नरेंद्र सिंह कुशवाह
अगस्त 2025 में भिंड में, भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह ने कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव को गालियां दीं, धमकाया और हाथ उठाने की कोशिश की।
यह उर्वरक की कमी से जुड़े विवाद में हुआ। वीडियो वायरल हुआ, लेकिन एफआईआर या कार्रवाई की कोई पुष्टि नहीं।
मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग हुई। यह ताजा मामला नेता की उस सोच को दिखाता है जहां कलेक्टर जैसा उच्च अधिकारी भी उनके आगे कुछ नहीं।