5000 रैंक वालों में से 339 ने नहीं लिया IIT में दाखिला, जॉइंट इंप्लीमेंटेशन कमेटी की रिपोर्ट में खुलासा​​​​​​​

IIT Joint Implementation Committee Report: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) को देश के सर्वोत्तम इंजीनियरिंग कॉलेजों में गिना जाता है। हर साल लाखों छात्र-छात्राएं जेईई (JEE) की कठिन परीक्षा पास करके यहां दाखिला लेने का सपना देखते हैं। लेकिन आईआईटी की जॉइंट इंप्लीमेंटेशन कमेटी (JIC) की हाल ही में आई रिपोर्ट ने सभी को हैरान कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती 5000 रैंक में आने वाले 339 छात्रों ने IIT में दाखिला ही नहीं लिया। यह चौंकाने वाली बात इसलिए भी है क्योंकि इतनी अच्छी रैंक पर उन्हें टॉप आईआईटी और मजबूत ब्रांच (जैसे कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल) आसानी से मिल सकती थी।

टॉप रैंकर्स ने छोड़ा आईआईटी

रिपोर्ट बताती है कि टॉप-100 रैंक में से भी 2 छात्रों ने आईआईटी में प्रवेश नहीं लिया। इसी तरह टॉप-500 में से 16 छात्र आईआईटी से दूर रहे। यह आंकड़ा दिखाता है कि अब छात्र केवल आईआईटी के नाम पर निर्णय नहीं ले रहे, बल्कि विकल्प ढूंढ रहे हैं। जिन छात्रों ने दाखिला लिया उनमें से अधिकतर ने आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी दिल्ली को चुना। टॉप-100 में 73 छात्रों को आईआईटी बॉम्बे और 19 को आईआईटी दिल्ली में सीट मिली। 6 छात्रों ने आईआईटी मद्रास का रुख किया। इसका साफ मतलब है कि टॉप रैंकर्स के बीच बॉम्बे और दिल्ली की लोकप्रियता सबसे ज्यादा है। अगर हम पहले 5000 रैंकर्स की बात करें तो 755 छात्रों ने बॉम्बे और 577 ने दिल्ली को चुना। वहीं आईआईटी भिलाई, पल्लकड़, तिरुपति, जम्मू और धारवाड़ जैसे नए आईआईटी में टॉप-1000 में से एक भी छात्र ने एडमिशन नहीं लिया। यह दर्शाता है कि छात्र अभी भी पुराने और स्थापित आईआईटी को ही प्राथमिकता दे रहे हैं।

सरकार का निवेश और छात्र की रुचि

केंद्र सरकार हर साल आईआईटी पर भारी राशि खर्च करती है। यह राशि कैंपस के इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक लैब, रिसर्च सुविधाओं और अन्य संसाधनों पर लगाई जाती है। इसके बावजूद देश के श्रेष्ठ छात्र नए आईआईटी की ओर आकर्षित नहीं हो रहे।

इंडिया टॉपर ने भी नहीं लिया एडमिशन

इस साल की परीक्षा में ऑल इंडिया 8वीं रैंक हासिल करने वाले देवेश भैया ने भी आईआईटी में दाखिला नहीं लिया। उन्होंने एमआईटी (मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) को चुना। देवेश का कहना है कि परीक्षा के दौरान हुई परेशानियों और आईआईटी के कुछ प्रोफेसरों के रवैये ने उनके निर्णय को प्रभावित किया। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। 2020 में ऑल इंडिया रैंक-1 चिराग फलोर ने भी आईआईटी छोड़कर एमआईटी में एडमिशन लिया था। इसी तरह इंडिया टॉपर चित्रांग मुरदिया और सतवत जगवानी ने भी पहले आईआईटी में पढ़ाई शुरू की, लेकिन एक साल बाद ही एमआईटी चले गए।

अब सवाल यह उठता है कि जब सरकार इतनी सुविधाएं दे रही है तो टॉप छात्र आईआईटी को क्यों छोड़ रहे हैं? विशेषज्ञ मानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर, रिसर्च का माहौल और करियर अवसर एमआईटी जैसे संस्थानों को छात्रों के लिए ज्यादा आकर्षक बनाते हैं। वहीं नए आईआईटी को लेकर छात्रों में भरोसा अभी पूरी तरह से नहीं बन पाया है।

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